सेब के फलों में रंग का विकास

सेब के फलों में रंग का विकास

(In English)

परिचय

जब भी कोई उपभोक्ता सेब ख़रीदने के लिए बाज़ार जाता है, तो वह साधरणतह वही सेब खरीदता है, जो उसकी आँखो को सबसे ज़ादा भाता है। रेड डेलीशियस, सेब का एक प्रमुख गुणवत्ता मापदंड उसकी त्वचा का रंग होता है। रंग उपभोक्ताओं के लिए सेब को खरीदने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हर सेब फल उत्पादक, इस तथ्य से वाकिफ होता है और जानता है कि सबसे अच्छे रंग वाले सेब का बेहतर मूल्य मिलेगा।

लाल रंग विकास में Anthocyanins की भूमिका

Anthocyanins पौधों में प्राकृतिक flavonoid यौगिकों के एक समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो सेब में लाल रंग के लिए जिम्मेदार होते है। आम तौर पर सेब में रंग विकास, सेब त्वचा में एंथोसायनिन पिगमेंट के गठन की वजह से होता है। Anthocyanins की एकाग्रता सेब के फल में रंग निर्धारित करने में सबसे महत्वपूर्ण कारक होती है।

SCARLET SPUR (II)

SCARLET SPUR (II)

 सेब में रंग प्रभावित करने वाले कारक

सूरज की रोशनी

सूरज की रोशनी सेब के रंग में सुधार करने के लिए आवश्यक है। पर्याप्त प्रकाश Anthocyanins संचय को उत्तेजित करता है, जिसके परिणामस्वरूप रंग का बेहतर विकास होने की संभावना होती है। जहाँ पेड़ की कैनोपी के अंदर फलों को सूरज की रोशनी कम प्राप्त होती है, वहाँ कम Anthocyanins का गठन होता है और फलों में कम रंग आने की संभावना रहती है ।

तापमान

तापमान फलों के रंग विकास और Anthocyanins गठन के लिए विपरीत रूप से आनुपातिक होता है। विशेष रूप से रात में कम तापमान के दौरान फल के रंग में वृद्धि होने की संभावना होती है। शोधकर्ताओं ने रेड डेलीशियस में बेहतर रंग पाया है, जब रात का तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया हो।

भूमि के ऊपर स्प्रिंकलर्स का उपयोग सेब के बगीचे के शीतलन, Anthocyanins गठन को बढ़ाने और गर्म दिन के तापमान के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए पानी की बड़ी मात्रा की आवश्यकता होती है और यह कवक संक्रमण को भी बढ़ावा दे सकता है।

नाइट्रोजन (एन)

अधिक नाइट्रोजन Anthocyanins गठन को कम कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप फलो में कम रंग आने की संभावना रह सकती है । इसलिए फल तुड़ान के समीप नाइट्रोजन का मिट्टी या पत्तों पर अनुप्रयोग नहीं करने की सलाह दी जाती है। नाइट्रोजन ग्रेनी स्मिथ जैसे सेब की कुछ किस्मों पर सीज़न में देर से प्रयोग किया जा सकता है, जहाँ लाल रंग वांछित नही होता है।

पोटेशियम (के)

पोटेशियम सीधे लाल रंग के साथ जुड़ा हुआ है। पोटेशियम निषेचन Anthocyanins गठन को बढ़ाती है और इसलिए फलों में बेहतर लाल रंग आता है । पोटेशियम उच्च नाइट्रोजन की क्षतिपूर्ति कर सकता है, जो की Anthocyanins गठन को रोकता है। इस लिए सीज़न मे देर से पोटेशियम उर्वरकों का आवेदन पेड़ के लिए लाभकारी माना गया है।

पत्तियां

पेड़ पर प्रति फल के लिए पर्याप्त संख्या में पत्तियां होनी चाहिए, अधिक पत्तियां Anthocyanins गठन को बड़ाती है। अधिक पत्ते प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को बढ़ाते है, जिसके परिणामस्वरूप अधिक शुगर का गठन होता है, जो की एंथोसायनिन गठन के लिए ज़रूरी होता है।

Ethephon आवेदन

Ethephon का छिड़काव फल के पकने की प्रक्रिया को बढ़ाता है। यह धीरे धीरे ethylene की विज्ञप्ति करता है, जो सेब में Anthocyanins गठन को बढ़ावा देता है। इसलिए समय से पूर्व तुड़ान पर फलों में बेहतर लाल रंग आ जाता  है।
इसका नकारात्मक प्रभाव यह है की यह फल की स्टोरबिलिटी को कम कर देता है और कभी कभी जल्दी फल ड्रॉप का कारण भी बनता है।

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