सेब के पेड़ों की समर्थन और प्रशिक्षण प्रणालियाँ

सेब के पेड़ों की समर्थन और प्रशिक्षण प्रणालियाँ

अगर सरल भाषा में कहें तो, सेब के पेड़ों की केवल तीन बुनियादी पेड़ समर्थन प्रणालियाँ होती हैं:

  • स्वावलंबी, बिना स्मार्थन खुद खड़े रहने वाले पेड़ प्रणाली।
  • सिंगल पोल समर्थन प्रणाली।
  • ट्रेल्लिस प्रणाली।

प्रत्येक समर्थन प्रणाली के भीतर बगीचे विकसित करने के लिए कई अलग अलग ट्रिम्मिंग और प्रशिक्षण प्रणालियाँ इस्तेमाल की जा सकती है।

स्वावलंबी सिस्टम:

इस सिस्टम मे आमतौर पर पेड़ 10 * 16 फीट से 16*24 फुट की दूरी पर लगाए जाते है। पेड़ों का घनत्व प्रति एकड़ 115 से 275 तक हो सकता है, इस प्रणाली मे आमतौर पर सीडलिंग का प्रयोग होता है।

इन बगीचो का अधिकतर हिस्सा सेंट्रल लीडर सिस्टम व्यवस्था के अंतर्गत प्रशिक्षित किया जाता है। सेंट्रल लीडर सिस्टम में मुख्य लीडर को पेड़ के केंद्र में विकसित किया जाता है और इस लीडर के आस पास कुछ स्थाई स्काफोल्ड डालियां विकसित की जाती है। विकसित हो जाने के बाद देखने में ये कुछ पिरामिड के आकर का नज़र आता है। यह प्रणाली जानने के लिए आसान है, प्रूनिंग प्रशिक्षण और संभालने के लिए भी आसान है और परिपक्व होने पर काफी उत्पादक साबित हो सकती है।

यह प्रणाली नए फल उत्पादकों के लिए एक अच्छी व्यवस्था है। यह प्रणाली सबसे धीमी गति से उत्पादन शुरू करती है और इस प्रणाली में ग़लती होने की संभावना भी कम रहती है। हिमाचल प्रदेश में यही प्रणाली सबसे अधिक प्रयोग में है।

सिंगल पोल प्रणाली

इस प्रणाली में पेड़ आमतौर पर 4 * 12 फीट से 10 * 18 फुट की दूरी पर लगाए जाते है। इस प्रणाली में पेड़ों का घनत्व प्रति एकड़ 250 से 900 पेड़ तक हो सकता है, परंतु सामान्य घनत्व 300-400 पेड़ होते है। इस प्रणाली में सामान्यता एमला 26 और एमला 7 साइज़ रूटस्टॉक्स का प्रयोग किया जाता है। इस प्रणाली में सामान्यता मॉडिफाइड सेंट्रल लीडर प्रणाली का प्रयोग होता है, जो की इस बात पर निर्भर करता है की बगीचे में पेड़ों का घनत्व कितना है। अधिक घने पेड़ों में, कम स्थायी स्काफोल्ड डालियां होती है हालांकि आमतौर पर सबसे नीचे वाली स्काफोल्ड डाली स्थायी होती है। उच्च घनत्व सिस्टम में छोटी डालियां होती है जिनका नवीकरण होता रहता है और कम ग्रोथ और कम लकड़ी का उत्पादन लक्ष्य होता है।
इन पद्धतियों को जानना काफी आसान होता है, और ये नए फल उत्पादकों के लिए बहुत ही सफल हो सकती है। समर्थन के लिए एक लकड़ी के डंडे का उपयोग किया जाता है। यह आम तौर पर २ से ४ इंच तक मोटा होता है। समर्थन के लिए धातु की नाली या लोहे के कोण का इस्तामाल भी किया जाता है, जो की मुख्य लीडर को समर्थन करता है ताकि वो फलों के भार से या हवा के प्रभाव से ज़मीन पर गिर ना जाए। इस प्रणाली में पेड़ आम तौर पर काफी जल्दी अच्छे उत्पादन के लिए तैयार हो जाते है ।

ट्रेल्लिस प्रणाली:

इस प्रणाली में पेड़ आमतौर पर 2 * 6 फीट से 6 * 14 फुट की दूरी पर लगाए जाते है। इस प्रणाली में पेड़ों का घनत्व प्रति एकड़ 500 से 2200 पेड़ तक हो सकता है परंतु सामान्य घनत्व 600-900 पेड़ होता है। इस प्रणाली में पेड़ हमेशा माल्लिंग 9 रूटस्टॉक्स पर ही लगाए जाते है। इस प्रणाली की मुख्य विशेषता यह है की इसमें मुख्य लीडर को ट्रेल्लिस (जंगला) में उपर की ओर उतना बढ़ने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, जितना की वो व्यावहारिक रूप से जा सकता है।  फल देनी वाली टहनियों को मुख्य लीडर के इर्द गिर्द बढ़ाया जाता है और उन्हें नियमित रूप से नवीकृत किया जाता है।
इस प्रणाली में लगभग कोई भी स्थायी टहनी (स्काफोल्ड टहनी) को नही रखा जाता। ये बहुत ही उत्पादक प्रणाली है जो जल्दी और भारी फसल का उत्पादन करती है। इस प्रणाली को प्रयोग में लाने के लिए बहुत ही कुशल और जानकार फल उत्पादक की आवश्यकता होती है।

ट्रेल्लिस या मुख्य समर्थन आमतौर पर पंक्ति के दोनो ओर लगाए जाते है, जिनका मोटापा कम से कम 6-8″ होना चहिए। पंक्ति के बीच बीच में 30-40 फीट पर सहायक समर्थन स्तंभो जिनका मोटापा 4-6″ हो , का प्रयोग होता है। इन सतम्भो में नियमित अंतराल की दूरी पर तारो को बिछाया जाता है। कुछ प्रणालियों में 6-10 तारों को प्रयोग भी होता है , परंतु ज़्यादातर सफल प्रणालियों में 2-4 तारों का प्रयोग होता है। इन तारों का प्रयोग फल देने वाली डालियों को समर्थन प्रदान करने के लिए किया जाता है।

ये सिस्टम स्थापित करने के लिए महंगा होता है, लेकिन इस प्रणाली में पेड़ उच्च गुणवत्ता वाले फलों का उत्पादन अपने जीवन काल में बहुत जल्दी शुरू कर देते है। इस प्रणाली की अधिकतम उत्पादन स्तर काफी हद तक अन्य सभी प्रणालियों के समान ही हो सकती है, परंतु फलों की गुणवता में बहुत सुधार होता है। उत्पादक भविष्य की तरफ देखते हुए कई क्षेत्रों में इन उच्च घनत्व वाले बागीचो की स्थापना की जा रही है।

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