परागण महत्व और मधुमाखियों की आवश्यकता

परागन

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अधिकांश सेब की किस्मे आत्म असंगत होती है और इसलिये विविधता अच्छा फल सेट प्राप्त करने के लिए एक उपयुक्त पॉलिनेटर किस्म के साथ पार परागण की आवश्यकता होती है। अगर व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखें तो, सभी सेब की किस्मों को ही आत्म-फलदायक नहीं माना जाना चाहिए। जिसका अर्थ है कि वे प्रभावी ढंग से खुद का परागन नहीं कर सकते है। यहाँ तक कि जो तथाकथित किस्में स्वयं फलदायक भी कहलाती है जेसे की गोल्डन डेलीशियस, इन क़िस्मों से भी लगातार फसल उत्पादन की गारंटी के लिए इनके आस पास भी दूसरी क़िस्मों के पेड़ होने आवशयक होते है। इसके अलावा, एक ही किस्म के सेब के दो उपभेदी (स्ट्रेन्स) किस्में भी परागण के लिए इतनी सफल नही होती जितनी की दो बिल्कुल ही भिन भिन किस्में। यहाँ तक कि कथित रूप से संगत किस्में भी प्रभावी ढंग से परागन नहीं करेगी अगर उनके फूल खिलने की अवधि एक दूसरे के साथ ना मिले। सेब के फूलों का परागण कीटों द्वारा होता है। हवा के द्वारा होने वालें परागण का सेब के पेड़ों मे कोई वास्तविक मूल्य नहीं होता है। कई कीट सेब के फूलों का दौरा करते हैं और उनमें से कुछ कुशल परागण में समर्थ होते हैं। वर्तमान में, हिमाचल प्रदेश में मधु मक्खी ही केवल उपलब्ध पॉलिनेटर एजेंट है जो प्रभावी ढंग से पॉलिनेशन में सक्षम है। इस लिए पॉलिनेशन के लिए मौनग्रह को बागीचों में रखना अत्यंत आवश्यक होता है। बागीचों में सफल पॉलिनेशन को सुनिश्चित करने के लिए मधु मक्खियों का प्रयोग ही एक मात्र सफल तरीका है।

A BEE HIVE

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परागण आवश्यकता

सेब के बागीचो में मधु मक्खी द्वारा परागण के लिए मानक सिफारिशें विकसित की गयी  है। यह सिफारिश की जाती है की सेब के बगीचे में प्रति 5 बीघा में मधुमक्खी का एक मौनग्रह होना आवशायक् है, लेकिन मौनग्रह के प्रत्येक छत्ते में मधुमक्खियों की बड़ी संख्या वाली एक मजबूत कॉलोनी होनी चाहिए। सेब परागण के लिए इस्तेमाल होने वाले किसी भी मौनग्रह में कम से कम छह फ्रेम होने चाहिए, जिसमें न्यूनतम 20,000 वयस्क मधु मखियाँ शामिल होनी चाहिए।एक मौनग्रह में मधुमखियों का मूल्यांकन करने के लिए एक बार में छते से अंदर या बाहर उड़ने वाली मधु मखियों की संख्या को गिना जा सकता है। एक दिशानिर्देश ये है कि 20,000 या उससे अधिक वयस्क मधुमक्खियों वाले छतों से एक गर्म दिन में प्रति मिनट प्रवेश द्वार से कम से कम 75 मधुमाखियाँ बाहर निकलनी चाहिए। हालांकि, मधु मखियों की गतिविधि पर्यावरणीय के कारकों से प्रभावित होती है और ये कारक है : हवा का बहाव, बादल, पिछली रात का तापमान, और कितनी समय से  छत्ता अपने वर्तमान स्थान में है।

मधुमाखियों को बगीचे में स्थानांतरित करने का  समय

बगीचे में मधुमक्खियों को स्थानांतरित करने के लिए सही समय किंग ब्लूम के खिलने से एक या दो दिन पहले का होता है। यह समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। अगर मधुमक्खियों को बहुत जल्दी ला दिया जाए तो वे कीटनाशकों के संपर्क में आ सकती है या फिर अन्य पौधों के फूल जो पहले से खिले हुए होते है उनकी आदी हो सकती  है। अगर सेब के पेड़ पहले से ही खिले हुए हो, तो मधु मखियाँ सीधे ही उन पर काम करना शुरू कर देती है और अन्य खिले हुए पौधों की तरफ आकर्षित नही होती। दूसरी ओर, यदि मधुमक्खियों को सेब के बगीचे में पेड़ों के खिलने के बाद लाया जाए तो वह किंग ब्लूम, जो की सबसे बेहतरीन फ्रूट सेट करता है उस वकत उपलब्ध नही होगी। मौनग्रह को उस स्थान पर रखा जाना चाहिए जहाँ विशेष रूप से सुबह के समय अधिकतम सूरज की रोशनी प्राप्त होती हो और इस प्रकार से रखा जाना चाहिए जहाँ से उनके प्रवेश द्वार पर सीधे हवा के प्रवाह का प्रभाव ना पड़ता हो। मौनग्रह को सेब के पेड़ों की छाया में रखे जाने से बचा जाना चाहिए और इन्हें बगीचे के उन स्थानों में नही रखा जाना चाहिए जहाँ रात को ठंड पड़ने की संभावना ज़्यादा होती है।

जल की आवश्यकता

मधु मक्खियों को पानी की जरूरत होती है और अगर वहाँ छत्ते के पास कोई पानी का स्त्रोत नहीं हो तो इसे खोजने के लिए महान दूरी तक उड़ सकती है। वे पानी का उपयोग संग्रहित शहद को पतला करने के लिए और इसे छतों में मजूद लार्वा को खिलाने के लिए करती है। अगर पानी का स्रोत छत्ते के 100 मीटर के भीतर उपलब्ध है, तो मधुमक्खियों को पानी की तलाश में कम वक्त खर्च करना पड़ता है और परागण के लिए और अधिक समय उपलब्ध हो जाता है।

अन्य पौधों से प्रतिस्पर्धा

अन्य  पौधों के फूल मधुमक्खियों के लिए ज़्यादा आकर्षक होते  हैं और यह मधुमक्खियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए सेब के फूलों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। यह सलाह दी जाती है की मधुमक्खियों को बगीचे में लाने से पूर्व सभी प्रकार के पौधों के फूलों को जो की सेब के फूलों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकते है उन्हें हटा दिया जाना चाहिए।

 पॉलिनेटिंग क़िस्मों की  आवश्यकताएँ

सेब उत्पादकों को सेब के पेड़ों का रोपण और पुनः रोपण करते वक्त  परागण  की आवश्यकताओं पर विचार करना चाहिए और उन पॉलिनेटर किस्मों को चुना जाना चाहिए जो की वाणिज्यिक रूप से लगाए जाने वाली सेब की किस्मों के साथ सबसे ज़्यादा संगत रखती हो। किस्मों के बीच संगतता, लगाई गयी परागण क़िस्मों के बीच की दूरी, और खिलने का  समय सभी महत्वपूर्ण होता हैं।

पूरक परागन के तरीके

गुलदस्ते

अगर मौसम के कारण मधु मखियों के द्वारा होने वालें परागन में रुकावट आ रही हो तो इस स्थिति से निपटने के लिए पॉलिनेटर किस्म के गुलदस्ते बना कर मुख्य किस्म के पास रखे जाने चाहिए। यह एक श्रमसाध्य कार्य है जिसमें अग्रिम योजना और  पॉलिनेटर क़िस्मों को काटने की आवश्यकता होती  है। यह गुलदस्ते किंग ब्लूम के बाद पॉलिनेटर किस्मों के पेड़ों से डालियां काट कर तैयार किए जाते है। यह गुलदस्ते बड़े होने चाहिए और इन्हें ताजा रखने के लिए बाल्टी या पानी के ड्रम में रखा जाना चाहिए। यदि संभव हो तो, प्रभावी परागण के लिए प्रत्येक मुख्य किस्म के पेड़ के साथ एक गुलदस्ता रखा जाना चाहिए।

मूधु मखियों के छते में पराग को सम्मिलित करना

अध्ययन बताते हैं कि मौनग्रह (मधु मखियों के छते) के अंदर हाथ से एकत्र पराग रखना सेब परागण को सुनिश्चित करने का एक प्रभावी तरीका हो सकता है। इस तरीके में जब मधुमाखियाँ अपने मौनग्रह से बाहर निकलती है तो उनके बालों में वहाँ रखे गये पराग के कुछ कण चिपक जाते है। फिर  इन पराग के कण का उस सेब के फूलों में हस्तांतरण हो जाता है जिन फूलों पर यह मधु मखियाँ उड़ के जाती  है। यह विधि तब सबसे ज़्यादा कारगर होती है जब विशुद्ध पराग का इस्तेमाल किया जाता है।

banpo

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