सेब के पेड़ों का प्रशिक्षण और प्रूनिंग

सेब के पेड़ों का प्रशिक्षण और प्रूनिंग

प्रस्तावना

एक लाभदायक सेब के बगीचे के संचालन के लिए पेड़ों का उचित प्रशिक्षण और छंटाई एक प्रमुख घटक है। सफल प्रूनिंग  वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित एक कला है जो पेड़ के विकास और पेड़ों के शारीरिक विज्ञान पर आधरित होती है। एक  बगीचे का डिजाइन, उदेश्य, और लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाना महत्वपूर्ण होता है और इसी हिसाब से प्रूनिंग सिद्धांतों को  अपनाया जाना चाहिए। सेब के पेड़ों के  प्रशिक्षण के लिए विभिन्न प्रणालियों  होती है, हम यहाँ सेंट्रल लीडर सिस्टम की व्याख्या करेंगे जो की हमारे बगीचो मे सबसे विख्यात प्रूनिंग ओर ट्रैनिंग सिस्टम है। सेंट्रल लीडर सिस्टम आमतौर पर उन पेड़ों के लिए अपनाया जाता है जो की ज़ादा ग्रोथ वाले और सेमी ड्वार्फ़ रूटस्टॉक्स पर लगाए जाते है। सेंट्रल लीडर सिस्टम प्रशिक्षण प्रणाली  के लिए सबसे उपयुक्त रूट स्टॉक  है  सीडलिंग ,mm.111, mm 106, और mm 793।

ट्रैनिंग ओर प्रूनिंग का उदेश्य

पेड़ों में प्रूनिंग वेजिटेटिव ग्रोथ(पेड़ो का विकास) और  रिप्रोडक्टिव ग्रोथ(फलों का उत्पादन) के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए की जाती है। इसके इलावा वांछित पेड़ के आकार को प्राप्त करना भी प्रूनिंग का एक उदेश्य होता है।  पेड़ की कॉनोपी खुली होनी चाहिए ताकी सूरज की रोशनी ओर कीटनाशक पेड़ों के अंदुरूनी भाग तक प्रवेश कर सके, ये उदेश्या भी प्रूनिंग से प्राप्त होता है। पेड़ की युवा अवस्था में की गई  ट्रैनिंग पे निर्भर करता है की बड़े होकर उसकी प्रूनिंग किस तरह होगी। युवा पेड़ों की उचित ट्रैनिंग से, समय और खर्च की बचत होती है।

सूरज की रोशनी की उपयोगिता

सूरज की रोशनी पेड़ विकास और फसल के लिए बहुत  महत्वपूर्ण होती है। सूरज की रोशनी पेड़ों के विकास के लिए ऊर्जा का एकमात्र स्रोत है। हरे पते सूरज की रोशनी को प्राप्त करके रोशनी की उर्जा को प्रकाश संश्लेषण के द्वारा रासायनिक ऊर्जा मे बदलते है। प्रकाश संश्लेषक उत्पादों  (कार्बोहाइड्रेट) वेजिटेटिव ग्रोथ, फ्रूट सेट, फ्रूट ग्रोथ, फ्रूट कलर, और फूल बड के खिलने और उनके विकास के लिए बहुत आवश्यक होती है। पेड़ का आकार, आकृति, और घनत्व पर निर्भर करता है की पेड़ को कितनी सूरज की रोशनी की आवशहयकता है। एक पेड़ के हर भाग को उच्च गुणवत्ता के फलों के उत्पादन के लिए कम से कम ३० प्रतिशत सीधे सूरज की रोशनी की आवशायता होती है, इस लिए प्रूनिंग करते समय इस बात का ख़ास तौर पर ध्यान रखना चाहिए की सूरज की रोशनी पेड़ के अंदुरूनी भागो तक पहुँचे।

शाखा झुकाव

पेड़ और पेड़ की शाखाओ के बीच का कोण अधिक होना चाहिए। कम कोण वाली शाखाएँ कमज़ोर होती है और अधिक फसल लगने पर टूट सकती है। अगर पेड़ और शाखा के बीच का कोण कम हो तो पेड़ के बड़े होने पर पेड़ और शाखा के बीच के स्थान को छाल के उतक भर देते है(bark inclusion), जो कमजोरी का कारण बनता है। कम कोण वाली शाखाओं को पेड़ की युवा अवस्था में ही या तो हटा देने चाहिए या शाखा को बल पूर्वक कोण को बढ़ने की कोशिश की जानी चाहिए।

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कृपया चित्र का अनुसरण करें

(A) वर्टिकल शूट स्पर्स का उत्पादन करते है ओर उनमें किनारों की तरफ कुछ ही शूट निकलते है।

(B) 60-45º कोण पर फैले हुए शूट मध्यम ग्रोथ वाले शूट्स और स्पर का उत्पादन करते हैं।post2

(C) 45º कोण से नीचे फैले हुए शूट्स मे से सीधे खड़े शूट्स उत्पन होते है जो गैर-फलदायक होते है।

(D) जब टहनी का किनारा टहनी का सबसे उँचा भाग नही होता फिर उस टहनी की ग्रोत रुक जाती है ओर टहनी के सबसे उँचे भाग से नए शूट बढ़ते है।

प्रूनिंग कट्स के प्रकार

प्रूनिंग कट्स के तीन बुनियादी प्रकार हैं

  1. हेड्डिंग
  2. थिनिंग
  3. बेंच

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